शनिवार, 24 अप्रैल 2010

मोबाइल

प्यार की फरमाइश ने अब नया रुख ले लिया है॥
बातो के सिलसिले को और लम्बा कर दिया है ||
जो बातें पहले होती थे उन खतो के जरिये-
अब मोबाइल ने उनको आत्मसात कर लिया है||
कहते हैं जमाना बदल गया है-
हाँ वाकई जमाना बदल गया,
बदला ही नहीं काफी आगे भी निकल चूका है |
क्यूँ निकला है , कब निकला है - नहीं मालूम,
बस कुछ बदलाव हर तरफ महसूस कर रहा हूँ |
बदलाव ने ठहराव का रुख मोड़ दिया है।
अब तो पलक झपकते ही होठो से निकले अलफ़ाज़-
पहुच आते हैं मेरे कानो में अमृत रस बनकर,,
येमोबाइल भी कमाल की चीज़ है, हाँ वाकई कमाल की चीज़ है,
शब्दों में मिठास भरकर जो पहुचाती है सुनने वालो के पास-
की मानो ह्रदय में पुलकित तरंगे उथल पुथल करने लगती हैं।


आगे की कविता पूराकरना है ||||||||\