प्यार की फरमाइश ने अब नया रुख ले लिया है॥
बातो के सिलसिले को और लम्बा कर दिया है ||
जो बातें पहले होती थे उन खतो के जरिये-
अब मोबाइल ने उनको आत्मसात कर लिया है||
कहते हैं जमाना बदल गया है-
हाँ वाकई जमाना बदल गया,
बदला ही नहीं काफी आगे भी निकल चूका है |
क्यूँ निकला है , कब निकला है - नहीं मालूम,
बस कुछ बदलाव हर तरफ महसूस कर रहा हूँ |
बदलाव ने ठहराव का रुख मोड़ दिया है।
अब तो पलक झपकते ही होठो से निकले अलफ़ाज़-
पहुच आते हैं मेरे कानो में अमृत रस बनकर,,
येमोबाइल भी कमाल की चीज़ है, हाँ वाकई कमाल की चीज़ है,
शब्दों में मिठास भरकर जो पहुचाती है सुनने वालो के पास-
की मानो ह्रदय में पुलकित तरंगे उथल पुथल करने लगती हैं।
आगे की कविता पूराकरना है ||||||||\
शनिवार, 24 अप्रैल 2010
रविवार, 13 सितंबर 2009
''यादें ''
तेरी यादों के साये में , मै गीत बनाया करता हूँ,
जीवन में हर पल सपनो का, संगीत बनाया करता हूँ|
तुम्ही थी वो शहजादी , जो दिल में बसा करती थी ,
सपनो में आकर मेरी , जो मुझको छेड़ा करती थी ,
अब तेरे विरह आगोश में, मै नीर बहाया करता हूँ ,
तेरी यादों के साये में , मै गीत बनाया करता हूँ|
नही पता था मुझको, तुम यूँ दूर चली जाओगी ,
जीवन के राहों में मुझको , तुम छोड़ चली जाओगी ,
बस अब बीते लम्हों का , मै तस्वीर बनाया करता हूँ ,
तेरी यादों के साये में , मै गीत बनाया करता हूँ,
जीवन में हर पल सपनो का, संगीत बनाया करता हूँ|
तुम्ही थी वो शहजादी , जो दिल में बसा करती थी ,
सपनो में आकर मेरी , जो मुझको छेड़ा करती थी ,
अब तेरे विरह आगोश में, मै नीर बहाया करता हूँ ,
तेरी यादों के साये में , मै गीत बनाया करता हूँ|
नही पता था मुझको, तुम यूँ दूर चली जाओगी ,
जीवन के राहों में मुझको , तुम छोड़ चली जाओगी ,
बस अब बीते लम्हों का , मै तस्वीर बनाया करता हूँ ,
तेरी यादों के साये में , मै गीत बनाया करता हूँ,
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